Saturday, 18 June 2016

ग्वालियर वाली भाभी की चुदाई

Gwalior wali bhabi ki chudai
हैल्लो दोस्तों, यह मेरी पहली कहानी है. मेरा नाम राज है और मेरी उम्र 25 साल है लम्बाई 5.10 गठीला शरीर है. दोस्तों में उम्मीद करता हूँ कि मेरी यह कहानी आप सभी को जरुर अच्छी लगेगी और अब में सीधा अपनी आज की एक सच्ची कहानी पर आता हूँ. दोस्तों यह घटना तब की है जब में रायपुर में रहता था और में वहां पर अकेला ही एक कमरे में किराए से रहता था क्योंकि में उस समय अपने कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के लिए दूसरे शहर से आया था और उसी घर में एक फेमिली भी रहती थी जो ग्वेलियार से आई थी. उस फॅमिली में चार लोग थे. श्याम जिनकी उम्र 35 साल, उनकी पत्नी स्वाती जिनकी उम्र 30 साल, उनकी एक बेटी रानू 12 साल और एक बेटा नितेश जिसकी उम्र 10 साल थी.
श्याम कहीं बाहर नौकरी किया करते थे इसलिए वो घर पर दो तीन महीने में एक बार आता था और रानू से मेरी बहुत अच्छी जमने लगी थी और वो अक्सर मुझसे गणित के सवाल पूछा करती थी और फिर धीरे धीरे स्वाती भाभी भी मुझसे घुल मिल गयी थी. दोस्तों उनका क्या मस्त सेक्सी फिगर था. उनका साईज 36-32-38 था दूध की तरह उनका एकदम गोरा रंग, लम्बाई करीब 5.4 थी, लेकिन मैंने पहले कभी भी उनको कोई ग़लत नज़र से नहीं देखा.
फिर समय ऐसे ही बीतता गया और फिर 6 महीने हो गये. हम अक्सर साथ बाहर घूमने, फिल्म देखने, शॉपिंग के लिए जाया करते थे और रास्ते में मेरी कई बार बाहर के लोगों से बहस भी हो जाया करती थी क्योंकि वो लोग भाभी को घूरते हुये उनको गंदी गंदी नजरों से देखते थे और उनके लिए गंदी गंदी बातें करते जैसे क्या कि वाह क्या गांड है यार क्या एक बार चोदने? लगता है कि पकड़कर चोद दूँ और साली की चूत फाड़ दूँ.
हम रोज़ रात को खाने के बाद इधर उधर की बातें किया करते थे और वो मुझे अपनी समस्या बताती थी. जैसे कि उन्होंने मुझे एक दिन बताया कि उनके पति ने कोई दूसरी लड़की पटा रखी है इसलिए वो अक्सर घर पर कम ही आते है और वो सिर्फ़ पैसे भिजवा देते है और सिर्फ़ पैसे से तो सब कुछ नहीं होता उसके आलावा भी मुझे कुछ और की कभी जरूरत होती होगी ना? दोस्तों शायद वो मुझे उस समय ग्रीन सिग्नल देती, लेकिन मेरे मन में ऐसा कुछ नहीं था. एक दिन की बात है और में उनके रूम में उनके बच्चो से मिलने गया तो मैंने देखा कि वहां पर कोई नहीं था और उनके दोनों बच्चे कहीं बाहर खेलने गए हुए थे.
मैंने आवाज़ लगाई और अंदर वाले रूम की तरफ चला गया. तभी मेरे तो एकदम से होश उड़ गये., मुझे ऐसा लगा कि जैसे में किसी दूसरी दुनिया में हूँ और में जैसे कोई खुली आखों से सपना देख रहा हूँ क्योंकि भाभी ठीक मेरे सामने पूरी तरह नंगी खड़ी हुई थी और उनके बदन पर कोई भी कपड़ा नहीं था शायद वो अभी अभी बाथरूम से नहाकर बाहर आई थी और अपने पूरे मस्त गोरे शरीर पर लोशन लगा रही थी और फिर जैसे ही मैंने उनको देखा तो हम दोनों की नज़रे एक दूसरे से मिल गई और कुछ पल के लिए हम एक दूसरे को देखते रहे जैसे कि वो वक़्त वहीं पर रुक सा गया हो.
फिर भाभी अपने टावल से अपने मस्त गोल बूब्स को मुझसे छुपाती हुई मुझसे हड़बड़ाकर बोली कि राज तुम यहाँ पर कैसे? तो में उनसे सॉरी बोलते बोलते वहाँ से बाहर निकल गया, लेकिन दोस्तों अब उनको इस तरस से अचानक देखने पर मेरे मन में भाभी के लिए कुछ और ही था. में शाम तक अपने रूम में बैठकर सिर्फ़ उनके बूब्स जिसके निप्पल स्ट्रॉबरी की तरह हल्के गुलाबी रंग के थे. उनकी तड़पती हुई चूत के होंठ किसी गुलाब की पंखड़ियों की तरह कोमल थी और में अब उसी के बारे में सोचता रहा कि आखिर कैसे में उस बदन को अपनी बाहों में भरकर उनके बूब्स को चूसता रहूँ और चूत को चूमता रहूँ? यह सब सोचते सोचते मुझे करीब शाम के 7 बज गये थे.
तभी भाभी मेरे रूम पर आई और मेरा मन तो कर रहा था कि उन्हे यहीं पर पटककर पूरा नंगा कर दूँ और उनकी ब्रा, पेंटी को फाड़ दूँ और इतना चोदूं इतना चोदूं कि उनकी आज चूत ही फट जाए और उनकी गांड, चूत, मुहं सबको इतना जमकर चोदूं कि वो चुदते चुदते बैहोश हो जाए, लेकिन में अब सिर्फ दिखावे के लिए उनके सामने अपना सर झुकाकर खड़ा हुआ था. तो भाभी मुझसे बोली कि राज जो सब कुछ आज हुआ है तुम उसे भूल जाओ ऐसा कभी कभी गलती से हो जाता है और फिर वैसे भी यह बात तो सिर्फ हम दोनों के बीच में ही है. मुझे उनके मुहं से यह बात सुनकर लगा कि वो शायद मुझे सिग्नल दे रही और मेरा लंड एकदम से तनकर लंबा हो गया और में अब मौका देखकर उनसे बात करते करते उनके बहुत पास गया और मैंने उन्हे ज़ोर से अपनी बाहों में जकड़ लिया और उनके गुलाबी रस भरे होंठो को चूमने लगा, लेकिन तभी इतने में वो मुझे अपने से दूर करके बोली कि राज यह सब करना बहुत ग़लत है और फिर वो वहां से चली गई.
दोस्तों अब तो में प्लान करने लगा कि कैसे में उन्हे चोद सकता हूँ और फिर दो महीने बीतने के बाद सब कुछ पहले जैसा हो गया था. एक रात को में उनके घर पर बैठा हुआ था कि तभी वो मेरे पास कोल्डड्रिंक लेकर आई और अब हम चारों कोल्डड्रिंक पीने लगे, तभी भाभी उठकर किचन की तरफ पकोड़े लेने चली गई. फिर मैंने उनकी कोल्डड्रिंक में छुपकर थोड़ी सी विस्की मिला दी और वो वापस आकर उसे पीने लगी, लेकिन ना जाने क्यों उन्होंने उसे फिर से नीचे रख दिया.
में अब बहुत डर गया और मन ही मन सोचने लगा कि शायद भाभी ने उसे सूंघकर नीचे रख दिया है और वो अब सब कुछ समझ चुकी है. तभी कुछ देर के बाद दोनों बच्चे अपने रूम में जाकर सो गए और भाभी ने अब अपना कोल्डड्रिंक उठाया और एक सीप लिया. फिर भाभी को लगा कि जैसे उसमे कुछ मिला है और वो मुझसे कहने लगी कि इसका स्वाद कुछ कुछ कड़वा है, लेकिन मैंने उन्हे समझाया कि वो आपको इन पकोड़ो की वजह से ऐसा लग रहा है और वो अब पूरी कोल्डड्रिंक पी गयी और उन्हे कुछ देर बाद हल्का सा नशा हो गया. और में उन्हे एलबम दिखाने के बहाने से अपने रूम में ले गया. उनकी चाल में अब कुछ लड़खपन था.
फिर हम दोनों एलबम देखने लगे. फिर हमने वो विस्की वाली ड्रिंक पी, लेकिन इस बार विस्की कुछ ज्यादा थी. एक बार पहले पीने की वजह से उन्हे अब पता नहीं चला और वो थोड़ी नशे में थी. फिर मैंने उनको बिस्तर पर लेटा दिया और वो मुझसे बोली कि राज तुम यह क्या कर रहे हो? तो मैंने कहा कि चुपकर साली, में आज अभी तुझे चोदने वाला और फिर में उनके ऊपर बैठ गया और दोनों बूब्स को कपड़ों के ऊपर से ही दबाने लगा. दोस्तों वाह क्या मस्त मुलायम बूब्स थे.
मुझे तो उन्हे दबाने पर ऐसा लग रहा था कि जैसे वो कोई हवा का गुब्बारा था. उसने मुझे अपने से दूर करने की ना काम कोशिश की लेकिन वो नशे में थी इसलिए कोई ज्यादा फायदा नहीं हुआ और अब में कुत्ते की तरह उसके होंठ चाटने लगा और गाउन को उतारने की कोशिश करने लगा, लेकिन नहीं उतार पाया तो मैंने उसे फाड़ दिया और फिर उसके ऊपर लेट गया और चूमने लगा उधर भाभी मुझे गाली दे रही थी कि कुत्ते कमीने मुझे छोड़ दे, में तेरी भाभी हूँ मदारचोद, तू मेरे साथ ऐसा मत कर हरामी, मेरी जिंदगी बर्बाद मत कर भोसड़ीवाले छोड़ दे मुझे और अब ज़ोर ज़ोर से रोने लगी, लेकिन तब तक मैंने अपना लोवर उतार दिया और मेरा लंड उसके मुहं में डालकर उनके मुहं को चोदने लगा जिसकी वजह से उनकी आवाज बिल्कुल बाहर आनी बंद हो गई और फिर मैंने कहा कि ले कुतिया ले तू अब मेरा लंड खा और अब तू कैसे मुझे गाली देती है? में देखता हूँ.
फिर मैंने कुछ देर बाद लंड को बाहर निकालकर उसे उल्टा लेटा दिया और ब्रा का हुक खोलकर पेंटी को नीचे खींचकर उसकी मस्त गांड को दबाने लगा वाह क्या मस्त गांड थी बिल्कुल चिकनी और नरम जिसे छूकर मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे में हवा में बादलों से खेल रहा हूँ और फिर में उसके दोनों पैरों को फैलाकर पीछे से उनकी उभरी हुई, फूली हुई चूत को चाट रहा था और चूस रहा था, लेकिन जैसे ही मैंने चाटना शुरू किया तो मैंने देखा कि अब उनकी गालियाँ सिसकियों में बदल गई थी और वो अब ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ ले रही थी उह्ह्ह्हह्ह आईईईई और ज़ोर से और हाँ उफ्फ्फफ्फ्फ़ राज मुझे बहुत अच्छा लग रहा अह्ह्ह्हह वाह बहुत मस्त है उम्म्म्म तभी उसने अचानक से पलटकर मेरे लंड को पकड़ लिया और बोली कि राज यह क्या है इतना लंबा और मोटा लंड? ऐसा तो मैंने आज तक नहीं देखा है में तो मर जाउंगी इसे अंदर लेकर तो आज मेरी चूत फट जाएगी और राज प्लीज तुम इसे अंदर मत डालना प्लीज यह मेरे लिए बिल्कुल भी नहीं है.
में : तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो मेरी जान तुम्हे कुछ नहीं होगा और मेरे साथ बस तुम्हे तो मज़ा ही मज़ा आएगा.
भाभी : नहीं राज, मेरी फट जाएगी. मेरी चूत बहुत छोटी है वो पूरी फट जाएगी और मुझे बहुत दर्द होगा.
फिर में उठा और किचन से थोड़ा तेल लेकर आ गया. मैंने थोड़ा तेल अपने लंड पर लगाया और इधर में उनके दोनों पैरों को पूरा फैलाकर लंड को अब धीरे धीरे चूत के अंदर डालना शुरू किया और उधर उनका चीखना चिल्लाना शुरू हो गया. शायद वो बहुत दिनों से चुदवा नहीं रही थी इसलिए उनको दर्द और ज्यादा हो रहा था, जैसे जैसे में दबाव बनाकर लंड को अंदर डालता तो उनकी सांसे रुक सी जाती और वो अपनी कमर को पूरा उठाकर एक जगह स्थिर हो जाती.
भाभी : प्लीज राज अब और अंदर मत डालो उह्ह्ह्हह्ह मत डालो प्लीज मत डालो अईईईईइ में उईईईईई मर गई.
इधर मेरा लंड अब तक पूरा अंदर घुस चुका था और भाभी की आखों से आंसू बाहर निकल गए उन्होंने मुझे बहुत कसकर पकड़ा हुआ था, लेकिन दस मिनट बाद मैंने लंड को धीरे धीरे अंदर बाहर करना शुरू किया और तब तक भाभी का दर्द भी थोड़ा सा ठीक हो गया था और अब वो भी मेरे साथ अपनी चुदाई के मज़े लेने लगी और मुझसे कहने लगी हाँ राज और ज़ोर से चोदो हाँ और चोदो, आज महीनो बाद मेरी चूत ने किसी के लंड का स्वाद चखा है उह्ह्ह्हह्ह्ह्हह आज तुम अपने लंड को मेरी चूत में पूरा अंदर घुसा दो आईईईईइईई चोदो मुझे और जमकर चोदो मुझे अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह. दोस्तों फिर में करीब 15 मिनट की जबरदस्त चुदाई के बाद उनकी चूत के झड़ गया और वो भी इस बीच एक बार झड़ चुकी थी. फिर वो अपने फटे गाउन के साथ कल एक बार फिर से मुझसे चुदवाने का वादा करके अपने रूम में चली गयी और अब में उनको वैसे ही पड़ा पड़ा पूरी रात सोचता रहा और मुझे पता नहीं कब नींद आ गई.
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अंजान लड़के से मेरी चूत चुद गई

अंजान लड़के से मेरी चूत चुद गई

मेरा नाम कविता कपूर है, मैं 22 साल की हूँ, लॉ की स्टूडेंट हूँ। पढ़ाई में होशियार हूँ, अच्छे घर की हूँ, बात पिछले महीने की है, मैंने और मेरी रूम मेट जिया दोनों जालंधर में पी जी रहती थी, सुबह से लेकर रात तक हम दोनों साथ रहती, क्योंकि एक ही क्लास में पढ़ती थी, शाम को एक ही रूम में रहती थी, तो दोनों में बहुत ही अच्छी दोस्ती थी, अब भी है।

करीब दो साल पहले मेरा एक बॉय फ्रेंड था, जिसके साथ मैंने 4-5 बार सेक्स भी किया था, मगर जब मैं डिग्री करने जालंधर आ गई, तो उससे दूर होने के वजह से सिर्फ फोन पे ही दोस्ती रह गई।
मगर जिया का हमारी ही यूनिवर्सिटी के एक लड़के से चक्कर चल पड़ा और दोनों अपनी लव लाईफ एंजॉय कर रहे थे।

जिया अपने यार के साथ जाकर 5-6 बार सेक्स भी कर चुकी थी, जब भी करके आती आकर मुझे बताती कि क्या क्या किया और कैसे कैसे किया, मेरा भी बड़ा मन करता, मगर मेरा तो कोई बॉय फ्रेंड ही नहीं था, और एक के होते दूसरे किसी से यारी लगाने का दिल सा नहीं किया।

खैर ऐसे ही वक़्त निकलता गया। 
एक दिन यूनिवर्सिटी से वापिस आई तो शाम का खाना खाकर हम वैसे ही अपने अपने बेड पे लेटी हुई थी, जिया अपने बॉय फ्रेंड से बात कर रही थी, मैं अपने से।
करीब साढ़े नौ बजे तक हम अपने अपने फोन पे बिज़ी रही।

जब फोन पे बात खत्म हुई तो जिया मेरे पास आई और बैठ कर हम दोनों अपने अपने यारों की बात करने लगी। मेरे बॉय फ्रेंड ने भी मुझसे बहुत से सेक्सी सेक्सी बातें की थी, जिस वजह से मेरा मन भी बहुत मचल रहा था।

ऐसे ही बात करते करते जिया ने पूछा- सुन कव, सेक्स करेगी।
मैंने थोड़ा हैरान होते हुये पूछा- सेक्स, और अब?
'हाँ, अब मेरा बॉय फ्रेंड आ रहा है, चुपके से दीवार फांद कर अंदर आएगा।' जिया बोली।
'मगर वो तो तेरा यार है, मैं उससे क्यों करूँ?' मैंने कहा।
'तो तेरे लिए अलग से यार मंगा लूँ, बोल, जस से कह दूँगी, अपने किसी दोस्त को ले आएगा!' जिया ने कहा।

मैंने कहा- अरे तू पागल हो गई है क्या, ऐसे कैसे किसी से भी सेक्स कर लूँगी मैं?
'देख यार जस यहाँ आएगा, मुझसे तेरे सामने मेरे ही बेड पे सेक्स करेगा, देख कर तेरा भी मन मचलेगा, तो क्यों न दोनों सहेलियाँ, एक साथ एंजॉय करें, मैं उधर तू इधर!' जिया ने प्रोपोज़ल रखी।

मैं कुछ सोचने लगी तो जिया फिर बोली- देख दिल तो तेरा भी कर रहा है, अगर लड़का पसंद न आया, तो मत करना अगर पसंद आ गया तो कर लेना, किसको पता चलने वाला है और हमारे सिवा और कौन देख रहा है, क्यों क्या बोलती है?'
जिया ने कहा तो मैंने भी अनमने से हा कर दी- ठीक है, अगर लड़का ठीक ठाक हुआ तो देख लेंगे।

जिया ने अपने बॉय फ्रेंड को फोन पे सब बता दिया।
करीब आधे घंटे बाद, दरवाजे पे दस्तक हुई, जिया ने उठ कर दरवाजा खोला, मैं अपने ही बिस्तर पे बैठी रही, दो लड़के अंदर आए, एक जिया का बॉयफ्रेंड था, जिसे अंदर आते ही जिया ने गले लगा लिया और उस लड़के ने भी जिया के होंठों पे ज़ोर से किस किया।

दूसरा लड़का भी अंदर आया, उसके हाथ कुछ था।
करीब 6 फीट लंबा, गोरा चिट्टा, देखने में भी सुंदर था और स्पोर्ट्समैन लग रहा था।
दोनों के टी शर्ट और बरमूडा ही पहने हुये थे।

जिया और उसका बॉय फ्रेंड तो जिया के बेड पे ही बैठ गए, और दूसरा लड़का कुर्सी पे बैठ गया।

थोड़ी देर जिया और उसका यार आपस में बातें करते रहे, वो लड़का चुपचाप कुर्सी पे बैठा रहा और मैं अपने बेड पे बैठी अपनी फोन पे लगी रही, चाहे मैं कुछ भी नहीं कर रही थी फोन पे, पर मेरा दिल बहुत तेज़ी से धड़क रहा था।

तभी जिया ने मुझे आवाज़ लगाई- अरे कव, वहाँ बैठी क्या कर रही है, इधर आ!
मैं थोड़ा कशमकश में उलझी उठ कर जिया के बेड के पास गई और एक साइड पे बैठ गई, तो जिया ने मेरा इंटरों अपने यार जस और उसके दोस्त दिलजीत से करवाया।

दोनों ने मेरे साथ हाथ मिलाया, जस का हाथ तो ठीक था, मगर दिलजीत का हाथ बहुत सख्त और मजबूत था, उससे हाथ मिलाते हुये मेरे दिल के तार झनझना उठे।
हाथ मिलाने के बाद उस लड़के ने मुझे एक गिफ्ट सा दिया- यह आपके लिए!
मैंने थैंक्स कह कर ले लिया और खोल कर देखा उसमे मेरी ही पसंद के चोकलेट्स थे, शायद जिया ने मेरी पसंद बता दी होगी।

हम दोनों में अभी कोई बात नहीं हुई थी, मगर जिया और जस का प्रोग्राम बन चुका था सो जस बोला- देखो भाई हम यहाँ बातें करने नहीं आए हैं, इस लिए हमारा बेड खाली करो, हमें एंजॉय करने दो और अगर आपने भी एंजॉय करना है तो अपने बेड पे जाओ।

मैं दिल की तरफ देखा तो वो कुर्सी छोड़ के उठ खड़ा हुआ, मैं भी उठी और अपने बेड पे जाकर बैठ गई।
मगर अब बात क्या शुरू करें और कौन शुरू करे।
जस और जिया ने चादर ओढ़ ली और दोनों ने चादर के अंदर खुसर मुसर शुरू कर दी।

फिर दिल (दिलजीत) ही बोला- आपके पास फोन कौन सा है?
मैंने उसे अपना फोन दिखाया।
'ओह गुड!' वो बोला- कौन से गाने फीड हैं इसमें?
मैं उसे अपने फोन पे डाऊनलोड किए हुये गाने दिखने लगी।
'और फिल्में भी हैं क्या?' दिल ने पूछा।
मैंने कहा- नहीं फिल्मे नहीं हैं।
'वटसऐप पे वीडियोज़ तो आती होंगी?' उसने पूछा।
'हाँ आती हैं।' मैंने कहा।

'कौन कौन सी?' उसने फिर पूछा।
मैंने उसे व्हाट्टसप की वीडियोज़ दिखने लगी।
'ये तो बच्चों वाली वीडियोज़ है, कोई बड़ों वाली वीडियो नहीं है क्या?' उसने शरारती अंदाज़ में पूछा।
मैं समझ तो गई मगर सिर्फ न में सर हिला दिया।

'मेरे पास हैं, देखना पसंद करोगी' उसने पूछा।
मतलब साफ था कि वो मुझे सेक्सी वीडियोज़ दिखा कर गरम करना चाह रहा था, जबकि गरम तो मैं पहले से ही थी, बस शर्म का लिहाफ ओढ़े लेटी थी।

मैंने कुछ नहीं कहा, मगर फिर भी उसने ने अपने मोबाइल पे एक सेक्सी वीडियो खोल कर मुझे देखने को दी। मैंने उसका मोबाइल अपने हाथ में पकड़ा और वीडियो देखने लगी, जबकि मन में मैं सोच रही थी 'यार ये क्या दिखा रहा है, तू सीधा ही आकर पकड़ ले मुझे 
मैंने कौन सा ना करनी है!
वीडियो में क्या था, एक अंग्रेज़ लड़की को एक अंग्रेज़ लड़का चोद रहा था।

जब 2 एक मिनट की वीडियो मैं देख चुकी तो दिल ने पूछा- कव, क्या मैं भी तुम्हारे साथ आ कर बैठ के ये वीडियो देख सकता हूँ। मतलब साफ था वो मेरे बेड पे बैठना चाहता था, मैंने उसके लिए जगह छोड़ी और बेड पे साइड में होकर बैठ गई।
वो भी मेरे बिल्कुल पास आकर साथ में सट कर बैठ गया।

कोई बढ़िया सा पर्फ्यूम लगा कर आया था, उसका मोबाइल मेरे ही हाथ में था, वो मोबाइल पे अलग अलग वीडियो चला कर दिखा रहा था, कभी कोई कभी कोई, इसी दौरान उसने अपना हाथ मेरे पीछे से घूमा कर मेरे कंधे के पास रख लिया।

एक तरह से मैं उसकी आगोश में आ गई थी, अब जब दोनों मोबाइल पर एक के बाद एक ब्लू फिल्में देख रहे थे, तो मेरा भी ज़्यादा नखरे करने का कोई मतलब नहीं बनता था, मैंने भी उसे इशारा देने के लिए उसके कंधे पर ही अपना सर टिका लिया, सर टिकाते ही उसने मुझे अपनी दोनों बाहों में ऐसे घेर लिया जैसे मैं न जाने कब से उसकी गर्ल फ्रेंड हूँ, खैर मुझे भी इस बात का कोई बुरा नहीं लगा।

जब 2-3 वीडियोज़ हमने देख ली तो दिल ने पूछा- कव, क्या मैं तुम्हें किस कर सकता हूँ?
मैं कुछ न बोली, तो उसने खुद ही मेरी ठोड़ी पकड़ी और मेरा चेहरा ऊपर को उठाया और मेरे होंठों पे एक हल्का सा चुम्बन लिया, मैंने कोई विरोध नहीं किया और उसे आराम से चूम लेने दिया।

मगर उसने एक चुंबन लेकर ही बस नहीं की, एक के बाद दो,तीन बार मेरे होंठों को चूमा और उसके बाद मेरे होंठों को अपने होंठों में ही लेकर चूसने लगा।
मुझे भी बहुत अच्छा लगा, मैं उसी की तरफ घूम गई और उसे अपनी बाहों में भर लिया, वो भी नीचे को सरक गया और मुझे सीधा लेटा कर ऑल्मोस्ट मेरे ऊपर ही चढ़ गया।

मेरे होंठ चूमते चूमते उसने मेरे बूब पे हाथ रखा और बड़े आराम से धीरे धीरे दबाया, पहले एक और फिर दूसरा।
मैं उसे किसिंग में सहयोग देती रही, मज़ा तो मुझे भी आ रहा था, चाहे ये बहुत अजीब लग रहा था कि जिस इंसान को मैं 15 मिनट पहले जानते भी नहीं थी, वो इस वक़्त मेरे बदन से खेल रहा था।

मेरी तरफ से सहयोग देख कर उसने मेरी टी शर्ट के अंदर हाथ डाला पहले मेरी पीठ को सहलाया और फिर हाथ आगे बढ़ा के मेरे बूब्स पे ले आया।
रात को सोते वक़्त मैं ब्रा पेंटी कभी नहीं पहनती सो नीचे से तो नंगी ही थी।

दोनों बूब्स को दबा दबा के मसलने के बाद वो बिल्कुल मेरे ऊपर आ गया, अपने पाँव से उसने मेरे दोनों पाँव अलग किए, अपनी टाँगों से मेरी दोनों टाँगें खोली और खुद को मेरे बीच में एडजस्ट कर लिया।
उसके कड़क लंड को मैं अपनी चूत पे लगा हुआ महसूस कर रही थी।

मेरी टी शर्ट उठा कर उसने मेरे दोनों स्तन बाहर निकाल लिए।
'वाउ, ब्यूटीहुल…' उसने कहा, फिर मेरे दोनों बूब्स को अपने हाथों में पकड़ कर दबाया और फिर बारी बारी से उन्हें चूसा।
न सिर्फ निप्पलों को चूसा बल्कि सारे के सारे बूब को अपनी जीभ से ऐसे चाटा जैसे उन पर शहद लगा हो।

बूब्स चाटने के बाद वो पे आ गया।
पेट और कमर के आस पास उसने खूब चूमा।
लगता था कि बेड कबड्डी का भी अच्छा खिलाड़ी था, हर दांव पेच से अच्छी तरह वाकिफ, कि लड़की को कैसे तड़पाते हैं।

फिर मेरी लोअर उतारने लगा तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया।
'क्या हुआ?' उसने पूछा।
'अभी नहीं!' मैंने कहा।

वो रुक गया, पर उसने अपनी टी शर्ट बरमूडा उतार दिया, नीचे से उसने फ्रेंची पहनी थी, छोटी सी चड्डी उसका लंड संभालने के लिए नाकाफी थी, इसीलिए उसका तना हुआ आधा लंड तो ऊपर से ही चड्डी से बाहर निकला पड़ा था।

मैंने देखा तो हंस पड़ी-अगर इससे बाहर ही रखना है तो पहनने का क्या फायदा?' मैंने कहा तो उसने चड्डी भी उतार के फेंक दी।

6 फुट का जवान, और 7 इंच के करीब उसका लंबा मोटा और काला लंड पूरी तरह से अकड़ा हुआ ऊपर को मुँह उठाए।
आस पास कोई बाल नहीं, शायद आजकल में ही शेव की हो।
हाँ सीने और पेट पर बाल थे, उसे नंगा देखा तो मैं देखती रह गई।
उसने आगे बढ़ कर मेरा लोअर उतारा, इस बार मैंने कोई विरोध नहीं किया। लोअर के नीचे तो मैं नंगी ही थी, मेरी गोरी चिकनी वीट से बाल रहित की साफ चूत को देखा तो बोला- वाह, कितनी प्यारी, कितनी मासूम सी पुस्सी है तुम्हारी, जी करता है खा जाऊँ इसे!

मैं कुछ नहीं बोली, उसने मेरी टाँगें खोली और नीचे आ कर अपना मुँह मेरी चूत से लगा दिया।
जब उसने अपनी खुरदुरी सी जीभ मेरी चूत के अंदर फेरी तो मेरे तो रोंगटे खड़े हो गए, मैं कसमसा उठी, कभी इस तरफ को पलटी मारूँ कभी उस तरफ को मगर उसने अपना मुँह मेरी चूत से नहीं हटाया।

आखिर मैं भी कब तक तड़पती मैंने भी हाथ बढ़ा कर उसका लंड पकड़ लिया।
उसने मेरी चूत छोड़ी, मेरी दोनों टाँगे खींच कर मुझे नीचे को खिसकाया और मेरी बगल में उल्टा हो कर लेट गया उसने फिर से मेरी टाँगे खोल कर अपना मुँह मेरी चूत से लगा दिया और मेरी चूत चाटने लगा, तो मैंने भी उसका लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी।

थोड़ी देर ऐसे ही चाटने के बाद उसने मुझे अपनी बाहों के ज़ोर से घूमा कर ऊपर कर लिया।
अब वो मेरे नीचे था और मैं ऊपर !
मेरी चूत से लेकर गाँड तक वो सब कुछ चाट गया।
ज़िंदगी में पहली बार किसी ने गान्ड को चाटा था, एक सिरे से दूसरे सिरे तक वो अपनी जीभ से चाट रहा था।

मैंने भी उसका लंड और आँड वगैरह सब कुछ अपनी मुँह में लेकर चूस गई।
सच में साले ने बहुत मज़ा दिया। 

दूसरे बेड पे क्या हो रहा था, हमें कुछ पता नहीं, न ही हमने उधर देखा, हम तो अपने ही मज़े में खोये थे।
जब चूसा चासी काफी हो गई, तो दिल ने पूछा- अब आगे बढ़ें?

मैं भी हाँ कह दी। उसने मुझे बेड बीचों बीच लेटाया और खुद भी मेरे ऊपर आ गया।
मैंने खुद अपनी टाँगे खोल कर उसके लंड का स्वागत किया।
मेरे ऊपर लेट कर उसने अपनी बाहें मेरे नीचे से निकाल कर मुझे अपनी आगोश में कैद कर लिया, फिर मेरे होंठों को चूसते हुये उसने अपना लंड मेरी चूत पे रगड़ना चालू किया।
सच में लंड की रगड़ से मेरी चूत में बहुत मज़ा आ रहा था और ऐसे ही रगड़ते रगड़ते अचानक उसने अपना लंड मेरी चूत के अंदर घुसा दिया।

चूत तो पहले सी गीली थी, सो एक बार में ही उसके लंड का टोपा अंदर घुस गया, मैं थोड़ा सा हिली- क्या हुआ, ठीक है?
दिल ने पूछा।

मैंने कहा- हाँ ठीक है।
तो दिल ने मेरी आँखों में देखते हुये बाकी का लंड भी मेरी चूत में घुसा दिया।
जब उसका पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया तो उसने बड़े ही आहिस्ता से अपना लंड आगे पीछे चलाना शुरू किया।
सेक्स तो मैंने अपने बॉय फ्रेंड से भी किया था, वो भी बहुत अच्छा था, मगर इसके सेक्स करने का अंदाज़ कुछ जुदा था, हर स्ट्रोक के साथ जैसे वो मेरे चेहरे के भाव पढ़ने की कोशिश करता कि कहीं मुझे कोई तकलीफ तो नहीं हो रही, वैसे भी उसने अपनी स्पीड स्लो ही रखी मगर निरंतरता बरकरार थी।

मोटा होने की वजह से उसका लंड मेरी चूत की सभी दीवारों से रगड़ के चल रहा था और मेरी चूत के कोने कोने की खुजली शांत हो रही थी।
करीब 5 मिनट उसने बड़े आराम से किया, मगर अब मेरा होने की कगार पर था, सो मैंने कहा-अब धीरे धीरे नहीं, ज़ोर ज़ोर से करो, एकदम तेज़!
मैंने तो कह दिया, मगर उसके बाद उसने जो अपनी ताकत जो जोश दिखाया मेरे तो होश ही उड़ गए, मेरे तो जिस्म के अंजर पंजर हिल गए।
क्या ज़ोर था साले में!

अगले एक मिनट में ही मेरा तो पानी छुट गया, मैं नीचे तड़प रही हूँ, स्खलित हो रही हूँ, क्या हो रही हूँ, फिर उसने इस बात की परवाह नहीं की।
जो चोदा जो चोदा, बस पूछो ही मत! कभी मेरे बूब्स पे काट खाता, कभी मुँह में जीभ डालता, कभी गालों को मुँह में लेकर चूसता, बस समझो कि खा गया मेरे को।

और अगले 15 मिनट उसने मेरे साथ ऐसे ही ज़बरदस्त चुदाई की।
उसकी एक चुदाई में मैं 2 बार डिस्चार्ज हो गई।
चूत तो ऐसे हो गई थी जैसे किसी ने सैंड पेपर लेकर रगड़ दी हो, अंदर तक छिली पड़ी थी।

जब उसका डिस्चार्ज होने वाला था, तब उसने कहा, 'कव मेरा होने वाला है, कहा करूँ?
'कहाँ मतलब, बाहर करो, प्रेग्नेंट नहीं होना मुझे!' मैंने कहा।
'मुँह में लोगी?' उसने पूछा।

मुझे तो डर लगा कि यह मेरा मुँह फाड़ देगा, मैंने कहा- नहीं बस बाहर कर दो।
 
उसके बाद के जो आखरी धक्के उसने मारे, वो तो ऐसे थे, जैसे वो अपना लंड मेरी चूत में डाल कर मेरे मुँह से बाहर निकाल देना चाहता हो, मेरी तो आँखों से भी पानी आ गया।
और फिर उसने चोदते चोदते एकदम से अपना लंड बाहर निकाला और उसके लंड से वीर्य की पिचकारियाँ निकल पड़ी, मेरा पेट, छाती, मुँह सब गंदा कर दिया उसने।
कितना माल छुड़वाया उसने।
मैं तो सारी की सारी गंदी हो गई। 

और वो भी जब निढाल हुआ तो बेड से ही नीचे गिर गया और वहीं पे लेट गया।
उसे नीचे गिरा देख कर जस और जिया भी उठ कर हमारे पास आ गए।

वो दोनों भी बिल्कुल नंगे थे, मुझे उनके पास आने पे शर्म आई मगर मैं इस हालत में ही नहीं थी कि उठ कर अपने कपड़े पहनती, या खुद को ढकती।

'वाह, दिल क्या शानदार चुदाई की तूने तो!' जिया बोली।
दिल ने नीचे लेटे लेटे कहा- तुमको करवानी है क्या?
जिया तो चुप रही, शायद उसके दिल में हाँ थी, मगर उसका बॉय फ्रेंड बोल पड़ा- हाँ हाँ, मुझसे भी कह रही थी कि दिल ने कव की माँ चोद दी, अब ऐसा कर तू इसकी भी माँ चोद दे।

जिया ने उसके एक हल्का सा घूंसा मारा प्यार में, दिल नीचे लेटे लेटे बोला- थोड़ा रुक जा, सांस लेने दे, फिर देखना, इसके सारे खानदान को न चोद डालूँ तो कहना।
जिया ने मुझसे पूछा- कव तू ठीक है?
मैंने साइड पे पड़ी चादर उठाई और उसे ओढ़ कर करवट लेकर लेट गई- हाँ मैं ठीक हूँ, थक गई हूँ, अब सोना चाहती हूँ।

उसके बाद लेटे लेटे मुझे कब नींद आ गई, पता ही नहीं चला।
अगले दिन सुबह 10 बजे के करीब आँख खुली, देखा तो जिया अपने बेड पे बिल्कुल नंगी लेटी सो रही थी।
मैंने उठ कर अपने कपड़े पहने और जिया को भी जगाया।

चाय पीते पीते जिया ने बताया- रात साढ़े 3 बजे दोनों गए, तुम तो सो गई, तुम्हारे बाद, पहले दिल ने और फिर जस ने एक बार और मेरे साथ सेक्स किया। सच में दिलजीत में तो जान ही बहुत है, जस भी ठीक है, मगर दिलजीत के सामने वो कुछ नहीं, मैंने साफ साफ जस से कह दिया, अगली बार आए तो अकेला नहीं आए, दिलजीत को साथ लाये।

मैंने उसे टोका- अरे नहीं, मुझे नहीं करना और!
चाहे मेरा दिल चाह रहा था कि दिलजीत ज़रूर आए।
तो जिया बोली- अरी बहनचोद तेरे लिए नहीं, मैं तो अपने लिए कह रही हूँ।
'अच्छा तो मेरे बॉय फ्रेंड पे अब तेरी नीयत खराब हो गई कमीनी?' मैंने हंस कर कहा।
तो जिया बोली- अरे काहे के बॉय फ़्रेंड्स, उनको भी पता है, हमने देनी है, हमें भी पता है उन सालों ने लेनी है, तो ये तो लेन देन है, कोई पक्का वादा नहीं, जब तक है चूत में दम, एंजॉय करेंगे हम।